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Study Materials 22-03-2018

दैनिक समसामयिकी

21 March 2018(Wednesday)

1.देश के 16 शहरों का हैप्पीनेस इंडेक्स-2017 जारी : चंडीगढ़ पहला, लखनऊ दूसरा, दिल्ली तीसरा सबसे खुश शहर
• राजधानी दिल्ली देश का तीसरा सबसे खुशहाल शहरों में शामिल है। यह बात देश के चुनिंदा 16 शहरों के हैप्पीनेस इंडेक्स-2017 में सामने आई है। इसमें चंडीगढ़ पहले, लखनऊ दूसरे, चेन्नई चौथे और बेंगलुरु पांचवें नंबर पर रहा।
• हैप्पीनेस इंडेक्स में यूपी चाहे सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल हों लेकिन लखनऊ देश के 3 सबसे खुशहाल शहरों में शामिल है। इस दृष्टि लखनऊ की सड़कों पर लिखा गया स्लोगन ‘मुस्कराए आप लखनऊ में है’ काफी सटीक है।
• देश के 23 राज्यों में राजस्थान 17वें नंबर पर है। केरल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और गोवा जैसे छोटे राज्य सबसे ऊपर हैं वहीं राजस्थान बिहार, झारखंड और यूपी जैसे बड़े राज्यों के साथ पिछड़ों की सूची में शामिल है।
इंडेक्स में चेन्नई चाैथे व बेंगलुरु 5वें नंबर पर
• जिन शहरों में खुशहाली की स्तर ठीक नहीं है, वहां बेरोजगारी का स्तर चिंताजनक है। रोजगार और सेवाओं में प्रतियोगिताएं बढ़ गई हैं जिससे अवसाद जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं। -विजय शंकर व्यास, अर्थशास्त्री
• दिल्ली में हैप्पीनेस कोर्स हालांकि, हैप्पीनेस इंडेक्स में दिल्ली देश के अन्य शहरों से काफी आगे है, बावजूद इसके दिल्ली सरकार ने इस साल से हैप्पीनेस कोर्स शुरू करने की घोषणा की है। यह कोर्स 1 अप्रैल से शुरू हो जाएगा।

2. रोजगार दर में गिरावट भारत के लिए चुनौती : ओईसीडी
• आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने कहा है कि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भले ही दुनिया के अधिकतर देशों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रोजगार वृद्धि दर में गिरावट चिंता का विषय है।
• ओईसीडी की यहां जारी रिपोर्ट ‘‘गोइंग फार ग्रोथ 2018’ में भारत के बारे में कहा गया है प्रति व्यक्ति जीडीपी अधिकतर विकसित एवं विकासशील देशों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। इसमें मुख्य योगदान श्रमिकों की उत्पादकता में वृद्धि का है। हालांकि रोजगार वृद्धि की घटती दर से, विशेषकर महिला कामगारों के मामले में, रोजगार का योगदान नकारात्मक रहा है।
• इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में गरीबी कम जरूर हुई है लेकिन असमानता बढ़ी है। धनाढ्यों और आय की असमानता बढ़ी है। मुख्य लोक सेवाओं में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर बहुत ज्यादा है।
• ओईसीडी ने कहा है कि विकास को समावेशी बनाने के लिए अधिक तथा बेहतर रोजगार सृजन प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए श्रम कानूनों को भी सरल और आधुनिक बनाया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच और प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है।
• उसने कहा है कि प्रशिक्षण पण्राली ऐसी होनी चाहिए कि रोजगार चाहने वालों की अर्हता काम के अनुरूप हो और उन्हें रोजगार के लायक बनाए जा सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद प्रशासन पर बोझ काफी हद तक कम हुआ है।

3. WTO के लिए साझा जमीन की जरूरत
• वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों से बहुपक्षीय व्यापार निकाय को मजबूत करने के लिए साझा जमीन की बनाने की अपील की। दिसम्बर में ब्यूनस आयर्स में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में गतिरोध के चलते इस दिशा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
• वैश्विक कारोबार में बढ़ते संरक्षणवाद के बीच आज यहां आयोजित डब्ल्यूटीओ की अनौ पचारिक बैठक में अमेरिका और चीन सहित 52 देश हिस्सा ले रहे हैं। भारत ने डब्ल्यूटीओ को पुनर्जीवित करने के विकल्प तलाशने के लिए यह बैठक बुलाई है। प्रभु ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि बैठक ऐसे समय हो रही है जब डब्ल्यूटीओ विभिन्न चुनौतियों और पण्रालीगत मुद्दों का सामना कर रहा है जिसमें ब्यूनस आयर्स, अज्रेंटीना में सामने आया गतिरोध भी शामिल है।
• उन्होंने कहा, यहां मौजूद आप लोगों में से अधिकतर इस बात से सहमत होंगे कि डब्ल्यूटीओ का आर्थिक वृद्धि, अंतरराष्ट्रीय व्यापार व विकास में योगदान है। यदि आप डब्ल्यूटीओ के योगदान को अहमियत देते हैं तो आप इसे मजबूत बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने पर सहमत होंगे। निष्क्रियता हम में से किसी की पसंद नहीं होनी चाहिए।
• प्रभु ने कहा कि हमारी आज की बैठक साझा हितों के सभी मुद्दों के साथ-साथ चुनौतियों के समाधान खोजने के लिए स्वतंत्र एवं बेबाक तरह से विचारों का आदान-प्रदान करने की सुविधा देगी।

4. डब्ल्यूटीओ बैठक : छाया रहा अमेरिका का संरक्षणवादी रवैया
• विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय बैठक में अमेरिका का संरक्षणवादी रवैया चर्चा का विषय बना रहा। डब्ल्यूटीओ के कई सदस्य देशों ने एल्युमीनियम और स्टील उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के अमेरिकी सरकार के फैसले को अनुचित बताया और इस पर चिंता जताई।
• सदस्य देशों ने कहा कि अमेरिका का यह रवैया विश्व व्यापार में बहुपक्षीय हितों के खिलाफ है। भारत ने भी खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादों पर सब्सिडी के मसले पर विकसित देशों की तरफ से पड़ रहे दबावों पर अपनी चिंता जाहिर की।
• भारत की मेजबानी में हुई दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय अनौपचारिक बैठक में 53 सदस्य देशों ने हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका, चीन और यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
• भारत में पाकिस्तान के राजदूत ने भी बैठक में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। पिछले साल ब्यूनस आयर्स में हुई के विफल हो जाने के बाद भारत के प्रयास पर इस बैठक का आयोजन किया गया था। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि इसका मकसद बातचीत फिर से शुरू करने के लिए रास्ता तलाशने की कोशिश करना था।
• बैठक में कई देशों ने भय जताया कि अमेरिका के ताजा कदम दुनियाभर में नए सिरे से ट्रेड वार की शुरुआत कर सकते हैं। बैठक में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि अमेरिका के कदम के प्रतिक्रियास्वरूप कई देश इस तरह के कदम उठा सकते हैं।
• इस आशय के एक सवाल पर डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक रॉबटरे एजेवेडो ने कहा कि वे अमेरिका के इस कदम से बेहद चिंतित हैं। एजेवेडो ने सोमवार को भी बैठक की शुरुआत करते हुए दुनियाभर के देशों में बढ़ रहे संरक्षणवादी रवैये पर चिंता जताई थी।

5.ब्रेक्जिट के बाद ट्रांजिशन पीरियड के लिए ईयू और ब्रिटेन में समझौता
• अगले साल होने वाले ऐतिहासिक ब्रेक्जिट के बाद परिवर्तन काल (ट्रांजिशन पीरियड) के लिए ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन (ईयू) एक समझौते पर सहमत हो गए। यह समझौता करीब 21 महीने प्रभावी रहेगा।
• यूरोपीय यूनियन के वार्ताकार माइकल बार्नियर ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परिवर्तन काल का यह समझौता 29 मार्च, 2019 (ब्रेक्जिट का दिन) से 31 दिसंबर, 2020 तक लागू रहेगा। इस दौरान यूरोपीय यूनियन की निर्णय लेने की प्रक्रिया में ब्रिटेन हिस्सा नहीं ले पाएगा, यानी मतदान नहीं कर पाएगा। इसके बावजूद वह अपने हितों, एकल बाजार और कस्टम्स यूनियन के फायदों को सुरक्षित रख पाएगा। लेकिन इस दौरान उसे यूरोपीय यूनियन के सभी नियमों का उसी तरह सम्मान करना होगा जैसे यूनियन के अन्य देश करते हैं।
• ब्रिटेन के ब्रेक्जिट सेकेट्री डेविड डेविस ने कहा कि परिवर्तन काल का समझौता ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के कारोबारियों व नागरिकों को निश्चितता की गारंटी देता है।
• खास बात यह है कि आयरिश सीमा को लेकर यूरोपीय यूनियन के ‘बैकस्टॉप’ प्लान पर भी ब्रिटेन सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। इसके तहत कोई बेहतर विकल्प नहीं मिलने तक ब्रिटेन शासित उत्तरी आयरलैंड यूरोपीय यूनियन की कस्टम्स यूनियन का हिस्सा बना रहेगा। हालांकि कुछ हफ्ते पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे ने कहा था कि कोई भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री इस योजना पर कभी सहमत नहीं हो सकता। हालांकि, इस मसले का पूरी तरह समाधान करने के लिए अभी दोनों पक्षों को और वार्ता करने की जरूरत है।
• यूरोपीय यूनियन इस बात पर जोर देता रहा है कि ब्रेक्जिट के किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यूरोपीय यूनियन के सदस्य आयरलैंड और उत्तरी आयरलैंड के बीच कोई ‘कठोर सीमा’ न हो। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 1998 के शांति समझौता की अवहेलना होगी जिसकी वजह से इस ब्रिटिश प्रांत (उत्तरी आयरलैंड) में दशकों से जारी सांप्रदायिक ¨हसा का खात्मा हुआ था।

6. बैंक बोर्ड की सिफारिशों को तवज्जों नहीं दे रही सरकार
• बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के प्रमुख विनोद राय ने मंगलवार को कहा कि बोर्ड की ज्यादातर सिफारिशों पर सरकार पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने वित्त मंत्रालय तथा इस ब्यूरो के बीच अधिक संवाद पर जोर दिया है।
• पूर्व नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) राय ने बोर्ड को अधिक अधिकार दिए जाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि अपने गठन के बाद से बीबीबी सिर्फ एक नियुक्ति बोर्ड के रूप में काम कर रहा है।
• राय का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बैंकिंग पण्राली में धोखाधड़ी से निपटने के लिए अधिक अधिकारों की मांग की है। राय ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में चाहती है कि बीबीबी सरकारी बैंकों के कामकाज के संचालन के मुद्दों को हल करे तो इसके लिए सरकार और ब्यूरो के बीच मजबूत संबंधों की जरूरत है।
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 में बीबीबी के गठन की मंजूरी दी थी। बीबीबी को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूर्णकालिक निदेशकों तथा गैर कार्यकारी चेयरमैन की नियुक्ति पर अपनी सिफारिशें देनी होती है।
• इसके अलावा पेशेवरों और अधिकारियों के ब्यूरो को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निदेशक मंडलों के साथ मिलकर बैंकों के लिए वृद्धि और विकास की रणनीति बनाने का भी जिम्मा सौंपा गया है।
• राय ने कहा कि यह ब्यूरो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए विशेषज्ञों का निकाय है जो वित्त मंत्री को इन बैंकों के संचालन और प्रदर्शन से संबंधित मामलों में सहयोग कर सकता है। फिलहाल यह ब्यूरो सिर्फ एक नियुक्ति बोर्ड की तरह काम कर रहा है।

7. गेहूं का रकबा 4.27% कम, फिर भी रिकार्ड 10 करोड़ टन उत्पादन होगा
• देश में इस साल गेहूं का रकबा भले 4.27% कम है लेकिन इसकी रिकॉर्ड 10 करोड़ टन पैदावार होने की संभावना है। चालू फसल वर्ष 2017-18 (जुलाई-जून) के लिए यह उम्मीद करनाल स्थित गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के डायरेक्टर जी पी सिंह ने जताई है।
• हालांकि, कृषि मंत्रालय के 27 फरवरी को जारी दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान में 9.71 करोड़ टन गेहूं की पैदावार होने का आकलन किया है। पिछले साल देश में 9.85 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। सिंह ने मंगलवार को कहा, ‘इस साल देश में गेहूं की फसल के लिए मौसम अनुकूल रहा है।
• ऐसी स्थिति में बालियों में दाना भरने और पकने के समय तापमान अनुकूल होने से गेहूं की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। मार्च में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। यह गेहूं की फसल के लिए अनुकूल है। इससे बम्पर पैदावार होने का अनुमान है।

8. अमेरिका में पेश विधेयक से खतरे में भारतीय कॉल सेंटरों की नौकरियां
• अमेरिकी संसद में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है जो पारित होकर अमल में आता है तो भारत जैसे देशों में कॉल सेंटर में काम करने वालों की नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है। इस विधेयक के प्रावधान के मुताबिक कॉलसेंटर कर्मियों को अमेरिकी ग्राहकों को अपनी लोकेशन बतानी होगी। साथ ही ग्राहक चाहे तो उसकी कॉल अमेरिका स्थित सर्विस एजेंट को ट्रांसफर करनी होगी।
• यह नया विधेयक अमेरिका के ओहियो प्रांत के सीनेटर शेरड ब्राउन ने संसद में पेश किया। इसमें यह भी प्रावधान है कि कॉल सेंटर जॉब्स को आउटसोर्स करने वाली कंपनियों की लिस्ट सार्वजनिक की जाएगी। जो कंपनियां जॉब्स आउटसोर्स नहीं करती हैं उन्हें फेडरल कॉन्ट्रैक्ट्स में तरजीह दी जाएगी।
• विधेयक में यह हैं प्रावधान : काॅल सेंटर कर्मियों को अपनी लोकेशन बतानी होगी
• अमेरिकी कर्मचारियों को तरजीह देने की वकालत : सीनेटर शेरड ब्राउन ने संसद में कहा कि कॉल सेंटर की जॉब्स काफी कमजोर होती हैं। बहुत सारी कंपनियों ने ओहियो समेत पूरे अमेरिका से अपने कॉल सेंटर बंद कर भारत और मैक्सिको जैसे देशों में खोल लिए हैं।
• अमेरिकी ट्रेड और टैक्स नीति ने कॉरपोरेट बिजनेस मॉडल को बढ़ावा दिया है। इससे कंपनियां अमेरिका के बजाय विदेश से कॉल सेंटर की नौकरियां आउटसोर्स कर रही हैं। इससे अमेरिकी कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में जरूरत है कि हम अपने कर्मचारियों के योगदान को अहमियत दें, न कि उन्हें बेरोजगार कर नौकरियां देश के बाहर ट्रांसफर कर दें।
• ग्राहक चाहे तो उसकी कॉल अमेरिका ट्रांसफर करनी होगी।
• भारत और फिलीपींस सबसे पसंदीदा जगह :-अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत और फिलीपींस कॉल सेंटर जॉब्स आउटसोर्स के लिए सबसे पसंदीदा जगह हैं। अब तो अमेरिकी कंपनियां मिस्र, सऊदी अरब, चीन और मैक्सिको में भी अपने कॉल सेंटर खोल रही हैं। यह दावा अमेरिका की सबसे बड़ी कम्युनिकेशन और मीडिया लेबर यूनियन ‘कम्युनिकेशन वर्कर ऑफ अमेरिका’ की एक रिपोर्ट में किया गया है।
• भारत : 1.82 लाख करोड़ की सालाना कमाई :- बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट इंडस्ट्री के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। आईटी उद्योग की शीर्ष संस्था नैसकाॅम के मुताबिक भारत को सालाना करीब 1.82 लाख करोड़ रुपए की कमाई होती है। इसमें अमेरिकी बाजार से होने वाली कमाई का बड़ा योगदान है। भारत की आर्थिक तरक्की में भी कॉल सेंटर इंडस्ट्री का अहम रोल रहा है।
• जॉब्स आउटसोर्स करने वाली कंपनियों की लिस्ट सार्वजनिक होगी : जो जॉब्स आउटसोर्स नहीं करती हैं, उन्हें तरजीह फेड कॉन्ट्रैक्ट्स में दी जाएगी
• आंकड़ों पर एक नजर
• 3.5लाख लोग भारत में कॉल सेंटरों में काम कर रहे हैं।
• 10%के बराबर है कुल बैक ऑफिस वर्कफोर्स में इनकी हिस्सेदारी।
• 31लाख लोग काम कर रहे हैं देश के बैक ऑफिस सेक्टर में।
• 8%की हिस्सेदारी है इस सेक्टर की भारत के जीडीपी में।

9.जल संरक्षण के लिए भारत के प्रयासों की यूएन ने की तारीफ
• बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण पूरा विश्व पानी की समस्या से जूझ रहा है। 2050 तक करीब पांच अरब लोग साफ पानी की किल्लत से जूझ रहे होंगे। इसके निपटान के लिए भारत, चीन समेत कई देश प्रयास कर रहे हैं जिसकी संयुक्त राष्ट्र संगठन ने सराहना की है।
• यूएन ने वल्र्ड वाटर डेवलेपमेंट की इस साल की रिपोर्ट में जल संरक्षण के प्राकृतिक उपाय तलाशने के लिए भारत की जमकर तारीफ की। यह रिपोर्ट सोमवार को ब्राजील में हो रहे एक कार्यक्रम के दौरान पेश की गयी थी। यूनेस्को के प्रमुख ऑड्रे एजोले ने कहा, जल संकट से बचने के लिए जल स्नोतों का संचयन आवश्यक है। वरना यह समस्या आने वाले वर्षो में भयावह रूप ले लेगी।
• यूएन ने अपनी रिपोर्ट में राजस्थान में काम कर रहे गैर-सरकारी संस्था तरुण भारत संघ का उदाहरण दिया। संघ ने अपने प्रयासों से 1986 में आए सूखे का सामना आसानी से कर लिया था। संगठन ने स्थानीय लोगों की सहायता से जल स्नोतों का संचयन कर जंगलों का प्रसार किया। इसके फलस्वरूप 20 से 80 फीसद जंगल बढ़े साथ ही भूमिगत जल स्तर भी छह मीटर ऊंचा हुआ।
• खेतिहर भूमि की उर्वरता में भी इजाफा हुआ। मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता भी 33 फीसद बढ़ी। रिपोर्ट में एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का भी जिक्र किया गया। 2015 में कई देशों के शीर्ष नेताओं ने इस पर अपनी सहमति दी थी। इसके तहत 2030 तक प्रत्येक व्यक्ति को साफ पानी और स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराया जाना है।
• चीन और यूक्रेन की भी तारीफ : यूएन ने अपनी रिपोर्ट में चीन के ‘स्पोनज सिटी’ अभियान की भी तारीफ की। इस अभियान के तहत वहां 70 फीसद वर्षा जल का पुनर्चक्रण किया जा रहा है। यूक्रेन के कृत्रिम वेटलैंड (दलदल भूमि) बनाने की योजना की भी प्रशंसा की गई।

Sorce of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

 

 

★મુખ્યમંત્રી શ્રી વિજયભાઇ રૂપાણી, બુધવાર ર૧મી માર્ચે આંતરરાષ્ટ્રિય વન દિવસ અવસરે બપોરે ૧ર કલાકે રાજ્યના નાગરિકો સાથે સેટકોમ વાર્તાલાપ કર્યો.

⭐યુનાઇટેડ નેશન્સ ઓર્ગેનાઇઝેશન UNO દ્વારા ૧૯૭૧થી પ્રતિવર્ષ ર૧મી માર્ચને વિશ્વ વન દિવસ તરીકે ઉજવવામાં આવે છે.

🌲🌳🌴★આ વર્ષના આંતરરાષ્ટ્રિય વન દિવસની થીમ 🌿‘ફોરેસ્ટ એન્ડ સસ્ટેઇનેબલ સિટીઝ’ રાખવામાં આવી છે.
🌳🌴2017 Theme: Forests and energy
🍁🍂★મુખ્યમંત્રીશ્રી ગાંધીનગરના ભાસ્કરાચાર્ય ઇન્સ્ટીટયૂટ ઓફ જીયો ઇન્ફરમેટીકસ એન્ડ સેટેલાઇટ કોમ્યુનિકેશન-બાયસેગ સ્ટુડિયોથી આ સંવાદ-વાર્તાલાપ કર્યો છે.
🍃🍂મુખ્યમંત્રીશ્રીનો આ પ્રજાસંવાદ વાર્તાલાપ બાયસેગ સેટેલાઇટ દ્વારા DTH વંદે ગુજરાત ચેનલ-૧ પરથી ગ્રામીણ કક્ષા સુધી જીવંત પ્રસારિત થયો.

★ગુજરાતમાં શહેરી ક્ષેત્રોમાં વનીકરણ, ગ્રીન કવર અને પર્યાવરણ સુરક્ષા અંગેના રાજ્ય સરકારના અભિગમમાં મુખ્યમંત્રીશ્રી આ સેટકોમ વાર્તાલાપ દ્વારા જનભાગીદારી પ્રેરિત કર્યું.

🌴☘🌴★અત્રે એ નિર્દેશ કરવો આવશ્યક છે કે, ગત વર્ષ આંતરરાષ્ટ્રિય વન દિવસના મુખ્યમંત્રીશ્રીના પ્રજા સંવાદ-વાર્તાલાપમાં રાજ્યભરના ૧૬.૩૯ લોકો બાયસેગ સેટેલાઇટ દ્વારા સહભાગી થયા હતા.

🌲🌴ઈ.સ.૧૯૭૨થી ૨૧મી માર્ચના દિવસ સમગ્ર વિશ્વમાં “વિશ્વ વન દિવસ” તરીકે ઉજવાય છે.

🌴🌲તંદુરસ્ત પર્યાવરણ માટે ૩૩ ટકા ધરતી પર જંગલો હોવા જોઈએ તેની જગ્યાએ ભારતમાં માત્ર ૧૩ % (ટકા) ધરતી પર જ તેમનું અસ્તિત્વ બચ્યું છે

🌴🌲વિશ્વ વન દિવસ નો મુખ્ય ઉદ્દેશ્ય વનો દ્વારા મળતા અગણિત લાભો,પેદાશો અને ઉપકારોને યાદ કરી તેનું ઋણ ચૂકવવાનો છે.

🌴🌲ગુજરતમાં કુલ જમીનના 10 ટકા જેટલ વિસ્તારમાં જંગલો આવેલા છે.

🌲🌳ચિપકો આંદોલન
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🔰💠👉દર વર્ષે માર્ચ ૨૧નાં રોજ આખા વિશ્વમાં વિશ્વ વન દિવસ ની ઉજવણી કરવામાં આવે છે. 🔰💠👉જેનો મુખ્ય ઉદ્દેશ્ય વનો દ્વારા મળતા અગણિત લાભો,પેદાશો અને ઉપકારોને યાદ કરી તેનું ઋણ ચૂકવવાનો છે. વનોને કઇ રીતે જાળવવા જોઇએ તથા તેને નુકશાન પહોંચાડ્યા સિવાય તેનું આયોજન અને વ્યવસ્થાપન કઇ રીતે કરવું જોઇએ કે જેથી અત્યાર સુધી મળતા ફાયદાઓ ભવિષ્યમાં પણ મેળવી શકાય તે અંગેની જાગૃતિ આ દિવસે ફેલાવવામાં આવે છે.

🔰💠👉ઇ.સ. ૧૯૭૧ માં મળેલી ૨૩મી “યુરોપિયન કોન્ફેડરેશન ઓફ એગ્રીકલ્ચર” ની સામાન્ય સભામાં આ દિવસ ઉજવવાનું નક્કી કરવામાં આવ્યું. 🔰💠👉જેને “યુનાઇટેડ નેશન્સ ફુડ એન્ડ એગ્રીકલ્ચર ઓર્ગેનાઇઝેશન” (Food and Agriculture Organization) દ્વારા પણ સહકાર મળ્યો.

💠🔰નવેમ્બર ૨૦૦૫માં “ફુડ એન્ડ એગ્રીકલ્ચર ઓર્ગેનાઇઝેશન (FAO)” (Food and Agriculture Organization) એ જાહેર કરેલ યાદી મુજબ💠👉 વિશ્વમાં દર મીનીટે ૨૫ હેક્ટર એટલેકે ૩૬ ફુટબોલ મેદાન જેટલા કુદરતી વનોનો નાશ થઇ રહ્યો છે. જો આ જ ઝડપે વનોનો નાશ થવાનો ચાલુ રહેશેતો કદાચ એક દિવસ પૃથ્વી વનવિહોણી બની જશે. ભારતનાં સંદર્ભમાં જોઇએ તો વૈજ્ઞાનિકોના મતે ઓછામાં ઓછી ૩૩% જમીન વનવિસ્તાર ધરાવતી હોવી જોઇએ,જેની સામે આજે ફક્ત ૧૨% જમીન વનવિસ્તાર ધરાવે છે.આથી આપણે ફક્ત વનોને બચાવવાનાંજ નથી પરંતુ વનવિસ્તાર પણ વધારવાની જરૂર છે.

🌴🌴વૃક્ષો આપણાં સારાં અને સાચાં મિત્રો છે.તે આપણને કેટલું બધું આપે છે.આપણો ખોરાક તેમાંથી મળે છે,તો વરસાદ લાવવામાં પણ તેઓ મદદરૂપ થાય છે,તો આપણો પ્રાણવાયું ઓક્સીજન પણ પુરો પાડે છે,અને વિવિધ ઉદ્યોગોમાં પણ તે વપરાય છે,અને આખા જીવન દરમિયાન સાથ આપતાં જીવન બાદ પણ લાકડું આપે છે જે બળતણની સાથે અંત્યેષ્ટિ માટે પણ વપરાય છે.આપણા જીવનની શરૂઆતથી અંત સુધી સાથ આપતા આટલા સારાં મિત્રોને જ આજે આપણે વિસારે પાડી દીધા છે…

🌱🌱🌱વિશ્વ વન દિવસ: વન જતન-સંવર્ધન અને વૃક્ષ ઉછેરથી ગ્લોબલ વોર્મિંગના પડકાર સામે સજ્જ થવા સમાજશકિતને મુખ્યમંત્રીશ્રીનું આહવાન
મુખ્યમંત્રી શ્રી વિજયભાઇ રૂપાણીએ ગ્લોબલ વોર્મિંગની વૈશ્વિક સમસ્યા સામે પર્યાવરણ સંવર્ધન-વૃક્ષ જતન વાવેતરથી સજ્જ થવા વિશ્વ વન દિને સમાજશકિતને આહવાન કર્યું છે.

આ સંદર્ભમાં તેમણે સ્પષ્ટપણે જણાવ્યું કે, વૃક્ષો, વન, જળ, પ્રાણીસૃષ્ટિ અને માનવજીવન બધા જ ‘વસુધૈવ કુટુમ્બકમ‘ની ભદ્રભાવનાથી પરસ્પર સંકળાયેલી અતૂટ કડી છે તેને વધુ સુદ્રઢ બનાવવાના સહિયારા પ્રયાસોથી જ વન દિવસની ઉજવણી યર્થાથ થશે.

ર૧મી માર્ચ આંતરરાષ્ટ્રીય વન દિવસ અવસરે રાજ્યના વનકર્મીઓ, વનમંડળીઓના સદસ્યો, સહભાગી વન વ્યવસ્થાના સમિતિઓના આદિજાતિ બંધુ ભગિનીઓ અને ૧૬ લાખ ઉપરાંત વન-પ્રકૃતિ પ્રેમીઓએ ‘બાયસેગ‘ સેટેલાઇટ માધ્યમથી ગાંધીનગરથી પ્રસારિત મુખ્યમંત્રીશ્રીનો પ્રેરક સંદેશ ઝીલ્યો હતો.

યુનાઇટેડ નેશન્સ દ્વારા પ્રતિવર્ષ ર૧મી જૂને ઉજવાતા વિશ્વ વન દિવસની આ વર્ષની ઉજવણીની થીમ વનો અને ઊર્જાની રાખવામાં આવી છે.

મુખ્યમંત્રીશ્રીએ પર્યાવરણના અસંતુલને સર્જેલી જલવાયુ પરિવર્તનની જ નહિ, પાણી, હવા, ખોરાક અને માનવ સ્વાસ્થ્ય સંબંધિત સમસ્યાઓના તારણોપાય તરીકે વૃક્ષાચ્છાદિત ધરતી કવચ અને હરિયાળી વૃધ્ધિની સંકલ્પના સમાજ સહયોગથી પાર પાડવાની પ્રતિબધ્ધતા વ્યકત કરી હતી.

શ્રી વિજયભાઇ રૂપાણીએ કહ્યું કે, કલાયમેટ ચેન્જ સામે માનવજાતના રક્ષણમાં વન અને વૃક્ષો અગત્યની ભુમિકા ભજવે છે. તેમણે આ પરિપ્રેક્ષ્યમાં વૃક્ષના ચાર મુખ્ય ગુણો સ્થિરતા, પરોપકારીતા, અ-યાચકતા અને નિરાભીપણાનો વિશેષ ઉલ્લેખ કરતાં ઉમેર્યુ કે, આજના સામાજિક, આર્થિક અને પર્યાવરણીય ત્રણેય પહેલુઓ સાથે ઊર્જા રક્ષણનો સમન્વય કરીને ટકાઉ વિકાસનો માર્ગ જ સમયની માંગ છે.

મુખ્યમંત્રીશ્રીએ વન સંપદા અને વૃક્ષોના મહત્તમ ઉછેરથી હરિયાળું કવચ રચવાની અનિવાર્યતા સમજાવતાં આ માટે સમાજ સમસ્તમાં જનઅભિયાન અને જન-જનમાં જાગૃતિ ફેલાવવાનું પ્રેરક આહવાન કર્યુ હતું.

‘‘આપણા સંતો-મહંતો પૂર્વજોએ વૃક્ષ જતન-ઉછેરની જે સંસ્કાર પરંપરા ઉભી કરી છે તે આપણે પણ જાળવી રાખી ભાવિ પેઢીને હરિયાળી ધરતી-પ્રદૂષણમૂકત જીવનનો વારસો આપીએ‘‘ તેમ મુખ્યમંત્રીશ્રીએ વૃક્ષ ઉછેરનું મહત્વ સમજાવતાં જણાવ્યું હતું.

શ્રી વિજયભાઇ રૂપાણીએ સૌનો સાથ સૌનો વિકાસના મંત્રને સાકાર કરવામાં વનસંપદાથી વનબંધુઓને પણ આર્થિક આધાર આપવાની નેમ દર્શાવી હતી. તેમણે વનબંધુઓ-આદિજાતિ પરિવારો જે વન વિસ્તારમાં વસવાટ કરે છે તેમને અર્થોપાર્જન-આર્થિક આધાર માટે વનપેદાશો એકત્રીકરણ, આયુર્વેદ ઔષધિય રોપા ઉછેર-વાવેતરની નવી પહેલ કરી છે તેમ પણ ઉમેર્યુ હતું.

શ્રી વિજયભાઇ રૂપાણીએ વન જતન સાથે સમગ્ર પર્યાવરણીય જાળવણીનો ભારપૂર્વક અનુરોધ કરતાં કહ્યું કે, વૃક્ષ-પ્રકૃતિનું શોષણ નહિં દોહન કરીને જ સમસ્યાઓનું સમાધાન લાવી શકીશું.

મુખ્યમંત્રીશ્રીએ બાયસેગ પટાંગણમાં પ્રતિક વૃક્ષારોપણ કર્યું હતું.

આંતરરાષ્ટ્રીય વન દિવસની ઉજવણી પ્રસંગે રાજ્યના વન અને પર્યાવરણ વિભાગના મંત્રીશ્રી ગણપતસિંહ વસાવાએ જણાવ્યું હતું કે, આંતરરાષ્ટ્રીય વન દિવસની ઉજવણી એ વૃક્ષો પ્રત્યે લાગણી ધરાવનારાઓનો ઉત્સવ છે.

મનુષ્યના જીવનનો મુખ્ય આધાર વન છે તેમ જણાવી મંત્રીશ્રીએ માહિતી આપી હતી કે, રાજ્યમાં જંગલોનાં જતન-સંવર્ધન માટે રાજ્ય સરકારે જનભાગીદારીને મહત્વ આપ્યું છે અને તેના કારણે જ આજે રાજ્યમાં ૩ હજારથી વધુ સહભાગી વન સમિતિ જંગલોમાં જતન-સંવર્ધન માટે કાર્ય કરે છે. આ કાર્ય સરકારનું કે સહભાગી સમિતિનું નહીં પરંતુ પ્રત્યેક નાગરિકનું છે એમ જણાવી સૌ નાગરિકોને વૃક્ષ વાવેતર અને તેના ઉછેર માટે સંકલ્પબધ્ધ થવા આહવાન કર્યું હતું.

ઉપગ્રહ પ્રસારિત આ કાર્યક્રમમાં વન રાજ્યમંત્રી શ્રી શબ્દશરણ તડવી, વન અને પર્યાવરણ વિભાગના અધિક મુખ્ય સચિવશ્રી અગ્રવાલ, અગ્ર મુખ્ય વનસંરક્ષકશ્રી તથા વનવિભાગ ઉચ્ચ અધિકારીઓ પણ બાયસેગ સ્ટુડીયોમાં ઉપસ્થિત રહ્યા હતા.

 

विश्व जल दिवस (World Water Day)

रियो डि जेनेरियो में 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED) विश्व जल दिवस की पहल में की गई। 22 मार्च याने विश्व जल दिवस। पानी बचाने के संकल्प का दिन। पानी के महत्व को जानने का दिन और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नही मिल रहा है। प्रकृति जीवनदायी संपदा जल हमें एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, हम भी इस चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना हमारी ज़िम्मेदारी है, चक्र के थमने का अर्थ है, हमारे जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से हम जितना पानी लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित न होने दें और पानी को व्यर्थ न गँवाएँ यह प्रण लेना आज के दिन बहुत आवश्यक है।

पानी के बारे में एक नहीं, कई चौंकाने वाले तथ्य हैं। विश्व में और विशेष रुप से भारत में पानी किस प्रकार नष्ट होता है इस विषय में जो तथ्य सामने आए हैं उस पर जागरूकता से ध्यान देकर हम पानी के अपव्यय को रोक सकते हैं। अनेक तथ्य ऐसे हैं जो हमें आने वाले ख़तरे से तो सावधान करते ही हैं, दूसरों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और पानी के महत्व व इसके अनजाने स्रोतों की जानकारी भी देते हैं।

• मुंबई में रोज़ वाहन धोने में ही 50 लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है।
• दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पाइप लाइनों के वॉल्व की खराबी के कारण रोज़ 17 से 44 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है।
• इज़राइल में औसतन मात्र 10 सेंटी मीटर वर्षा होती है, इस वर्षा से वह इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात कर सकता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटी मीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है।
• पिछले 50 वर्षों में पानी के लिए 37 भीषण हत्याकांड हुए हैं।
• भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन चार मील पैदल चलती है।
• पानीजन्य रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
• हमारी पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी है। इसमें से 97.5 प्रतिशत पानी समुद्र में है, जो खारा है, शेष 1.5 प्रतिशत पानी बर्फ़ के रूप में ध्रुव प्रदेशों में है। इसमें से बचा एक प्रतिशत पानी नदी, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने के लायक है। इस एक प्रतिशत पानी का 60 वाँ हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों में खपत होता है। बाकी का 40 वाँ हिस्सा हम पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ़-सफ़ाई में खर्च करते हैं।
• यदि ब्रश करते समय नल खुला रह गया है, तो पाँच मिनट में करीब 25 से 30 लीटर पानी बरबाद होता है।
• बाथ टब में नहाते समय 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि सामान्य रूप से नहाने में 100 से 150 पानी लीटर खर्च होता है।
• विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है।
• प्रति वर्ष 3 अरब लीटर बोतल पैक पानी मनुष्य द्वारा पीने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
• नदियाँ पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। जहाँ एक ओर नदियों में बढ़ते प्रदूषण रोकने के लिए विशेषज्ञ उपाय खोज रहे हैं वहीं कल कारखानों से बहते हुए रसायन उन्हें भारी मात्रा में दूषित कर रहे हैं। ऐसी अवस्था में जब तक कानून में सख्ती नहीं बरती जाती, अधिक से अधिक लोगों को दूषित पानी पीने का समय आ सकता है।
• पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियाँ से हमें पानी मिलता है।
• आलू में और अनन्नास में 80 प्रतिशत और टमाटर में 15 प्रतिशत पानी है।
• पीने के लिए मानव को प्रतिदिन ३ लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी चाहिए।
• 1 लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है, एक किलो गेहूँ उगाने के लिए 1 हजार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए 4 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।

समय आ गया है जब हम वर्षा का पानी अधिक से अधिक बचाने की कोशिश करें। बारिश की एक-एक बूँद कीमती है। इन्हें सहेजना बहुत ही आवश्यक है। यदि अभी पानी नहीं सहेजा गया, तो संभव है पानी केवल हमारी आँखों में ही बच पाएगा। पहले कहा गया था कि हमारा देश वह देश है जिसकी गोदी में हज़ारों नदियाँ खेलती थी, आज वे नदियाँ हज़ारों में से केवल सैकड़ों में ही बची हैं। कहाँ गई वे नदियाँ, कोई नहीं बता सकता। नदियों की बात छोड़ दो, हमारे गाँव-मोहल्लों से तालाब आज गायब हो गए हैं, इनके रख-रखाव और संरक्षण के विषय में बहुत कम कार्य किया गया है।

पानी का महत्व भारत के लिए कितना है यह हम इसी बात से जान सकते हैं कि हमारी भाषा में पानी के कितने अधिक मुहावरे हैं। आज पानी की स्थिति देखकर हमारे चेहरों का पानी तो उतर ही गया है, मरने के लिए भी अब चुल्लू भर पानी भी नहीं बचा, अब तो शर्म से चेहरा भी पानी-पानी नहीं होता, हमने बहुतों को पानी पिलाया, पर अब पानी हमें रुलाएगा, यह तय है। सोचो तो वह रोना कैसा होगा, जब हमारी आँखों में ही पानी नहीं रहेगा? वह दिन दूर नहीं, जब सारा पानी हमारी आँखों के सामने से बह जाएगा और हम कुछ नहीं कर पाएँगे।

लेकिन कहा है ना कि आस का दामन कभी नहीं छूटना चाहिए तो ईश्वर से यही कामना है कि वह दिन कभी न आए जब इंसान को पानी की कमी हो।

लेकिन कहा है ना कि आस का दामन कभी नहीं छूटना चाहिए तो ईश्वर से यही कामना है कि वह दिन कभी न आए जब इंसान को पानी की कमी हो। विज्ञान और पर्यावरण के ज्ञान से मानव ने जो प्रगति की है उसे प्रकृति संरक्षण में लगाना भी ज़रूरी है। पिछले सालों में तमिलनाडु ने वर्षाजल संरक्षण कर जो मिसाल कायम की है उसे सारे देश में विकसित करने की आवश्यकता है।

जल दिवस का प्रारम्भ

‘विश्व जल दिवस’ मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को की थी। ‘विश्व जल दिवस’ की अंतरराष्ट्रीय पहल ‘रियो डि जेनेरियो’ में 1992 में आयोजित ‘पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (यूएनसीईडी) में की गई थी, जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में ‘जल दिवस’ के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।

आप सिर्फ कुछ सेकेंड्स के लिए सोचिए कि अगर पानी ना हो, तो आपके कितने सारे काम रुक जाएंगे। जिस ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का दंभ दुनिया भर की सरकारें भरती हैं, वो सबसे पहले धाराशायी होगा। उसके बाद तो जो होगा वो होगा ही।

अब भी है उतना ही पानी लेकिन
यह बात तो स्पष्ट है कि GDP के नाम पर बेतहाशा आर्थिक विकास, संसाधनों का अनुपयुक्त दोहन, औद्योगीकरण और जनसंख्या विस्फोट से पानी का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इन सबके चलते पानी की खपत भी बढ़ रही है। हालांकि एक बात यह भी सच है कि जितना पानी आज से 2,000 साल पहले था, उतना ही अब भी है लेकिन उस वक्त की आबादी आज की कुल आबादी का सिर्फ 3 फीसदी ही थी।

सब भुला दिया जाता है
मैं दुनिया भर की बात नहीं करने जा रहा। मैं सिर्फ भारत की ही बात करुंगा। ये वो देश है जहां पानी का राजनीतिकरण हो जाता है। ये वो देश है जहां दो राज्यों के लिए आपस में सिर्फ पानी के बंटवारे के लिए सिर फुटौव्वल करते हैं। गर्मी आते ही देश के दिल्ली, मुंबई सरीखे इलाकों में पानी का संकट शुरु हो जाता है। तमाम नगरपालिकाओं और महानगरपालिकाओं के चुनाव में पानी मुख्य मुद्दा होता है लेकिन रूठे हुए को मनाकर सरकार बनाने के बाद सब भूला दिया जाता है।

ये होगी जरूरत
अब बात आंकड़ों की करते हैं। सेंट्रल वाटर कमीशन बेसिन प्लानिंग डारेक्टोरेट, भारत सरकार की ओर से 1999 में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार देश में घरेलू उपयोग के लिए जहां साल 2000 में 42 बिलियन क्यूबिक मीटर की जरूरत थी, वो साल 2025 में बढ़कर 73 बिलियन क्यूबिक मीटर और फिर साल 2050 में जरूरत 102 बिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगी।

बढ़ती ही रहेगी जरूरत
इसी तरह सिंचाई, उद्योग, उर्जा समेत अन्य को जोड़कर सालाना जरूरत को ध्यान में रखा जाए तो साल 2000 में जहां 634 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत थी, वो साल 2025 में बढ़कर 1092 बिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगी और फिर साल 2050 में जरूरत 1447 बिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगी।

बनाई गई है जलनीति
यहां आपको बताना जरूरी हो जाता है कि हमारे देश में राष्ट्रीय जल नीति – 2012 बनाई गई। इससे पहले राष्ट्रीय जल नीति – 1987 भी बनाई गई थी। दोनों में लगभग समान बातें कही गई हैं। अब ये बाते किसके, कितनी समझ में आई, ये सर्वे का मुद्दा है। एक बार फिर से आंकड़ों की ओर चलते हैं।

जब आती है बाढ़
अगर हम देश के जमीनी क्षेत्रफल में से मात्र 5 फीसदी क्षेत्रफल में ही गिरने वाले बारिश के पानी को इकट्ठा कर सकें तो एक बिलियन लोगों को 100 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन मिल सकता है। हमारे देश में एक और अजीब बात है। अब इसे संयोग कहें या दुर्भाग्य। देश के तमाम हिस्सों में हर साल बाढ़ आती है। नदियां अपने उफान पर होती हैं और इन्हीं इलाकों में सूखा पड़ता है।

काश की जलनीति का ये हाल होता
वो चाहे मध्य प्रदेश का मालवा हो या फिर उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल। यूपी में ही बुंदेलखंड भी है, वहां की तो बात करना फिलहाल राष्ट्रीय जल की तमाम नीतियों का अपमान करने सरीखा होगा। इन नीतियों में जो कुछ भी लिखा या बताया गया है अगर उसका 50 फीसदी हिस्सा भी लागू हो जाए तो फिर यहां की समस्या ही खत्म हो जाए।

क्या ये बताने की जरूरत है?
यहां ये सब बताने की जरूरत तो बिल्कुल महसूस नहीं होती कि हमारी बहुत सारी नदियां प्रदूषित हो गई हैं। वो चाहे हाल ही में अदालत की ओर से जीवित मनुष्य का दर्जा प्राप्त नदी गंगा हो या फिर मध्य प्रदेश की बेतवा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में असि की हालत खराब है।

कहीं ये ना छूट जाए
इसी असि के नाम पर अस्सी घाट बनाया गया है। वरुणा, कुआनो, मनोरमा सरीखी नदियों का नाम तो स्थानीय लोग जानते ही होंगे। वैसे भी पानी में प्रदूषण की बात क्या करना? बेंगलुरु की झीलों में आग तो ईश्वरीय अनुकंपा से लगती है। भले वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सब प्रदूषण की वजह से हुआ है।

खैर, आज ये जरूरी है विश्व जल दिवस मना लिया जाए। कहीं कोई स्टेटस, डीपी या पानी के लिए तरसते किसी बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने से ना छूट जाए। इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। तमाम दिवसों की यह भी अपनी एक सच्चाई है।

 

Class III માટે ના મહત્વના દિવસો

09. જાન્યુઆરી અપ્રવાસી ભારતીય દિવસ
10. જાન્યુઆરી વિશ્વ હાસ્ય દિવસ
12. જાન્યુઆરી રાષ્ટ્રીય યુવા દિવસ
15. જાન્યુઆરી સેના દિવસ
23. જાન્યુઆરી દેશ પ્રેમ દિવસ
25. જાન્યુઆરી ભારત પ્રવાસી દિવસ
26. જાન્યુઆરી ગણતંત્ર દિવસ / આંતરરાષ્ટ્રીય કસ્ટમ્સ દિવસ
30. જાન્યુઆરી શહિદ દિવસ / વિશ્વ કુષ્ઠ નિવારણ દિવસ- 10 ફેબ્રુઆરી વિશ્વ વિવાહ દિવસ
14. ફેબ્રુઆરી વેલેંટાઇન દિવસ
20. ફેબ્રુઆરી અરૂણાચલ દિવસ
24. ફેબ્રુઆરી કેન્દ્રીય આબકારી દિવસ
28. ફેબ્રુઆરી રાષ્ટ્રીય વિજ્ઞાન દિવસ
01. માર્ચ રાષ્ટ્રીય સુરક્ષાદિવસ
08. માર્ચ આંતરરાષ્ટ્રીય મહિલા દિવસ / વિશ્વ સાક્ષરતા દિવસ
15. માર્ચ વિશ્વ ગ્રાહક અધિકાર દિવસ / વિશ્વ વિકલાંગ દિવસ
18. માર્ચ આયુધ કારખાના દિવસ (ભારત)
21. માર્ચ વિશ્વ વન દિવસ
22. માર્ચ વિશ્વ જળ દિવસ
23. માર્ચ વિશ્વ મૌસમ વિજ્ઞાન દિવસ
24. માર્ચ વિશ્વ તપેદિક દિવસ
26. માર્ચ બાંગ્લાદેશ દિવસ
05. એપ્રિલ સમતા દિવસ
07. એપ્રિલ વિશ્વ સ્વાસ્થય દિવસ
10. એપ્રિલ રેલ્વે સપ્તાહ (10 એપ્રિલ થી 16 એપ્રિલ)
12. એપ્રિલ વિશ્વ વિમાનિકી અને અંતરિક્ષ યાત્રી દિવસ
13. એપ્રિલ જલિયાવાલા બાગ દિવસ
15. એપ્રિલ હિમાચલ દિવસ
17. એપ્રિલ વિશ્વ હિમોફિલિયાદિવસ
18. એપ્રિલ વિશ્વ પૈતૃક સંપતિ દિવસ (હેરિટેજ)
21. એપ્રિલ સચિવ દિવસ
22. એપ્રિલ પૃથ્વી દિવસ
23. એપ્રિલ વિશ્વ પુસ્તક દિવસ
01. મે આંતરરાષ્ટ્રીય મજદૂર દિવસ
03. મે વિશ્વ પ્રેસ સ્વતંત્રતા દિવસ
08. મે વિશ્વ રેડ ક્રોસ દિવસ
15. મે વિશ્વ પરિવાર દિવસ
16. મે સિક્કિમ દિવસ
17. મે વિશ્વ દૂરસંચાર દિવસ
21. મે આતંકવાદ વિરોધી દિવસ
23. મે આફ્રીકા દિવસ
23. મે રાષ્ટ્ર મંડળ દિવસ
29. મે એવરેસ્ટ દિવસ
31. મે વિશ્વ તંબાકૂ નિષેધ દિવસ
05. જૂન વિશ્વ પર્યાવરણ દિવસ
15. જૂન વિશ્વ વિકલાંગ દિવસ
18. જૂન ગોવા મુક્તિ દિવસ
20. જૂન પિતૃ દિવસ
25. જૂન સંયુક્ત રાષ્ટ્ર ચાર્ટર હસ્તાક્ષર દિવસ
26. જૂન નશાખોરી અને અવૈધ વેપાર વિરોધી આંતરરાષ્ટ્રીય દિવસ / આપાતકાલ વિરોધી દિવસ
27. જૂન વિશ્વ મધુમેહ દિવસ (ડાયાબિટિસ)
01. જુલાઇ ચિકિત્સક દિવસ
06. જુલાઇ વિશ્વ જોનોસિસ દિવસ
11. જુલાઇ વિશ્વ જનસંખ્યા દિવસ
01. ઓગષ્ટ સ્તનપાન સપ્તાહ (1 ઓગષ્ટ થી 7 ઓગષ્ટ)
03. ઓગષ્ટ આંતરરાષ્ટ્રીય મિત્રતા દિવસ
06. ઓગષ્ટ હિરોશિમા દિવસ
09. ઓગષ્ટ નાગાસાકી દિવસ / ભારત છોડો દિવસ
15. ઓગષ્ટ સ્વતંત્રતા દિવસ
20. ઓગષ્ટ સદભાવના દિવસ
29. ઓગષ્ટ રાષ્ટ્રીય ખેલ દિવસ
05. સપ્ટેમ્બર સંસ્કૃત દિવસ
14 સપ્ટેમ્બર હિન્દી દિવસ
16 સપ્ટેમ્બર વિશ્વ ઓઝોન દિવસ
21 સપ્ટેમ્બર અલ્જાઇમર્સ દિવસ
22 સપ્ટેમ્બર શાંતિ અને અહિંસા દિવસ / ગુલાબ દિવસ
26 સપ્ટેમ્બર બધિર દિવસ
27 સપ્ટેમ્બર વિશ્વ પર્યટન દિવસ
02 ઓક્ટોબર ગાંધી જયંતિ / લાલ બહાદુર શાસ્ત્રી જયંતિ / વિશ્વ પશુ દિવસ / વિશ્વ વૃદ્ધ દિવસ / વિશ્વ શાકાહાર દિવસ
03. ઓક્ટોબર વિશ્વ આવાસ દિવસ
04. ઓક્ટોબર વિશ્વ વન્ય જીવ કલ્યાન દિવસ- 08 ઓક્ટોબર વાયુ સેના દિવસ
09. ઓક્ટોબર વિશ્વ ડાકઘર દિવસ
10. ઓક્ટોબર રાષ્ટ્રીય ડાક દિવસ
11. ઓક્ટોબર વિશ્વ એલર્જી જાગરૂકતા દિવસ
13. ઓક્ટોબર સંયુક્ત રાષ્ટ્રઆંતરરાષ્ટ્રીય પ્રાકૃતિક આપદા ન્યૂનીકરણ દિવસ
14. ઓક્ટોબર વિશ્વ માનક દિવસ
15. ઓક્ટોબર વિશ્વ વ્હાઇટ કેન દિવસ
16. ઓક્ટોબર વિશ્વ ખાદ્ય દિવસ
21. ઓક્ટોબર પોલિસ સ્મરણોત્સવ દિવસ
24. ઓક્ટોબર વિશ્વ સૂચના વિકાસ દિવસ / સંયુક્ત રાષ્ટ્ર દિવસ
27. ઓક્ટોબર શિશૂ દિવસ
30. ઓક્ટોબર વિશ્વ મિતવ્યયિતા દિવસ
31. ઓક્ટોબર રાષ્ટ્રીય એકતા દિવસ / રાષ્ટ્રીય પુનઃ સમર્પણ દિવસ- ઓક્ટોબર નો બીજો ગુરૂવાર વિશ્વ દૃષ્ટિ દિવસ
09. નવેમ્બર વિધિક સેવા દિવસ
14. નવેમ્બર બાળ દિવસ / વિશ્વમધુમેહ દિવસ
17. નવેમ્બર રાષ્ટ્રીય મિરગીદિવસ
18. નવેમ્બર સૈપર્સ દિવસ
19. નવેમ્બર નાગરિક દિવસ
20. નવેમ્બર આફ્રીકા ઔદ્યોગિકરણ દિવસ
29. નવેમ્બર ફિલિસ્તાનિયો પ્રતિ વિશ્વ સહાનૂભુતિ દિવસ 01. ડિસેમ્બર વિશ્વ એડસ દિવસ
03. ડિસેમ્બર આંતરરાષ્ટ્રીય વિકલાંગ દિવસ
04. ડિસેમ્બર નૌ સેના દિવસ
05. ડિસેમ્બર આંતરરાષ્ટ્રીય વોલંટિયર વિકાસ દિવસ
07. ડિસેમ્બર ધ્વજ દિવસ / સશસ્ત્ર સેના ધ્વજ દિવસ
10. ડિસેમ્બર આંતરરાષ્ટ્રીય બાળ પ્રસારણ દિવસ / માનવ અધિકાર દિવસ (સંયુક્ત રાષ્ટ્ર)
14. ડિસેમ્બર રાષ્ટ્રીય ઉર્જા સંરક્ષણ દિવસ
18. ડિસેમ્બર અલ્પ સંખ્યક અધિકાર દિવસ (ભારત)
23. ડિસેમ્બર કિશાન દિવસ

Updated: 22nd March 2018 — 2:57 pm

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